भारत और रूस की दोस्ती अमेरिका को कुछ ज्यादा ही खटक रही है। हाल ही में भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती देख अमेरिका में भारत को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में अमेरिकी सांसदों ने यहां की संसद के उच्च सदन से पास ‘रूसी प्रतिबंध विधेयक’ में कुछ बदलाव की सिफारिश की है। सांसदों ने मांग की है कि इस बिल में प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे भारत का नाम लिख दिया जाए। बता दें कि अमेरिका रूस और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को टारगेट करने के लिए यह कानून ला रहा है। अगर बिल पास होता है तो अमेरिका भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकता है।
अमेरिका की यह बौखलाहट नई नहीं है। इससे पहले भी अमेरिका भारत को कई बार रूस से तेल खरीदने का हवाला देते हुए निशाना बना चुका है। अमेरिका ने आरोप लगाए है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसका हवाला देते हुए पिछले साल भारत पर 50 फीसदी टैरिफ भी लगा दिया था। हालांकि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। अब अमेरिका इस बिल के तहत भारत, चीन सहित अन्य देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है।
क्या है 'लिंडसे ओ ग्राहम राशिया सैंक्शन बिल? अमेरिकी सीनेट में यह बिल पिछले महीने पास करा लिया गया था। अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में बिल के पास होने का इंतजार है। कथित तौर पर बिल को दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में लाया गया है। ग्राहम भारत के धुर आलोचक में से एक थे और भारत पर मोटा टैरिफ लगाने की वकालत भी करते थे। इस साल उनका निधन हो गया था। इसके बाद अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के भारी बहुमत से 'लिंडसे ओ ग्राहम एक्ट' को मंजूरी दी थी। बिल का मुख्य मकसद रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उसके उस 'शैडो फ्लीट' यानी गुप्त जहाजी बेड़े को तबाह करना है। अमेरिका का कहना है कि रूस इसके जरिए चोरी-छिपे तेल का व्यापार कर रहा है।
बिल में क्या बदलेगा? अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले अमेरिकी सांसदों ने इस बिल में कई बड़े संशोधन पेश किए हैं। डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने बिल में भारत का नाम सीधे लिखने की मांग की है। दरअसल बिल में पहले सिर्फ ‘रूस से तेल खरीदने वाले देशों’ का जिक्र था। इसमें किसी देश का नाम नहीं था। हालांकि अब इसमें भारत और चीन का नाम अलग से जोड़ने की मांग की गई है।
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने भी संशोधन पेश कर मांग की है कि बिल में भारत और चीन का नाम खुलकर लिखा जाए। उन्होंने कहा है कि रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों का नाम साफ-साफ लिखा जाए और उन पर 100 फीसदी टैरिफ ठोका जाए। इन देशों में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।

