तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने सोमवार, 14 सितंबर को गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले केंद्रीय जेल भेज दिया गया, जहां वह अपनी सजा काटेंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को वर्ष 2021 में निचली अदालत से मिले बरी होने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने उन्हें 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया था, जिसे पीड़िता को दिया जाना है।
मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में पत्रिका के एक आयोजन के दौरान होटल की लिफ्ट में एक जूनियर सहकर्मी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। निचली अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने अपील की थी।
हाईकोर्ट ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ), 354ए और 354बी के तहत दोषी करार दिया था। बरी होने के करीब पांच साल बाद आए इस फैसले ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को आत्मसमर्पण से छूट की उनकी याचिका खारिज करते हुए तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तेजपाल की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है, बशर्ते 21 सितंबर तक आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र दाखिल हो जाए।

